Tuesday, January 5, 2010

Chaand - Poem written on 8 Feb in 2003

ऐ चाँद तेरा ये निखारा यौवन, कहता है पुकार के,
तेरे हुस्न पे है ये रौनक, मेरे प्यार के दीदार से |

तेरे किरणों की ये चमक, यूँ निखरती ये रश्मियाँ,
मेरे प्यार के शबनमी चेहरे से, तुझे मिली ये अरुणिम झलकियाँ|
कवियों ने लिखा तेरे बारे में, वे उलझे रहे तेरे हुस्न की चिलमन के रेशमी तारों में|
वो ना जान सके तेरे चेहरे पर, मेरे प्यार की परति अगणित नज़र,
वो ना बूझ सके तेरे चेहरे के पीछे छिपा मेरी सावरी का प्यार अमर|
जो देता है तुझे भी निखार, मेरी सावरी का ही है वो प्यार|

बस इतना कर ऐ मेरे यार, जा कह उसे ये बार बार,
वो है मेरा प्यार, वो है मेरा प्यार, वो है मेरा प्यार वो है मेरा प्यार|
रिणीं तू उसका, रिणीं मैं तेरा, कर दे एक और ये उपकार,
बस इतना कर ऐ मेरे यार, जा कह उसे ये बार बार,
वो है मेरा प्यार, वो है मेरा प्यार, वो है मेरा प्यार वो है मेरा प्यार|

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